Aadhaar unites family with 21 year old specially-abled man, missing for 6 years

source: Ministry of Electronics & IT /Posted On: 01 SEP 2022 5:54PM by PIB Delhi

Aadhaar unites family with 21 year old specially-abled man, missing for 6 years

Missing from Bihar since 2016, young man identified through Aadhaar, found from Maharashtra (Nagpur) in 2022

Aadhaar has played a crucial role once again in uniting the lost member of a family. This time a 21-year old specially-abled young man was united with his family after missing for six years.

Considered missing since November 2016 from Khagaria district of Bihar, the disabled man (deaf and dumb) was traced via Aadhaar in Nagpur, Maharashtra in August 2022. There is growing evidence on how Aadhaar is enabling ease of living not just as a digital backbone for welfare service delivery, but also helping families get reunited with missing members.

A missing child aged 15 years was found at Nagpur Railway Station on 28 Nov 2016. Since the child was specially abled, with speech and hearing impairments (deaf and dumb), Railway authorities after due process handed him over to Government Senior Boys Orphanage in Nagpur. He was given a name called Prem Ramesh Ingale.

Vinod Daberao, Superintendent of the orphanage and the counselor visited Aadhaar Seva Kendra (ASK) in Nagpur in July 2022 for Aadhaar registration of ‘Prem Ramesh Ingale’. But the Aadhaar could not be generated against this enrolment as the biometrics were matching with another exiting Aadhaar number.

Following which ASK Nagpur approached UIDAI regional office Mumbai. On verification it emerged that the concerned young man has an existing Aadhaar, since 2016 with the name called Sochan Kumar having address of a locality in Khagaria district of Bihar.

After further scrutiny and verifications, and following the due procedure, authorities disclosed the identity of the young man to the superintendent of the orphanage. With cooperation from the local police in Khagaria (Bihar), the family was informed.

Subsequently the mother and four relatives of the young man arrived in Nagpur with requisite documents from concerned Police authorities, and their village ‘Sarpanch’ in the third week of August.

The case has once again proved prowess of Aadhaar platform. Mr. Sachin Kumar is now re-united with his family, mainly due to the Aadhaar.

Handing over procedure of the child, as per rule of the Child Welfare Committee, and direction of the Honourable Court, have been legally completed, jointly by the Superintendent and the counselor of the orphanage.

आधार ने 21 साल के दिव्यांग युवक को परिवार से वापस मिलाया, युवक 6 साल से लापता था

बिहार से 2016 से लापता युवक की पहचान, आधार के जरिये 2022 में महाराष्ट्र (नागपुर) में हुई

एक परिवार के खोए हुए सदस्य को परिवार से वापस मिलाने में आधार ने एक बार फिर अहम भूमिका निभाई है। इस बार, एक 21 वर्षीय दिव्यांग युवक, छह साल तक लापता रहने के बाद अपने परिवार से वापस मिला है।

बिहार के खगड़िया जिले से नवंबर 2016 से लापता दिव्यांग युवक (बोलने और सुनने की अक्षमता) के बारे में अगस्त 2022 में नागपुर, महाराष्ट्र में आधार के माध्यम से पता चला। इस बात के उदाहरण निरंतर प्राप्त हो रहे हैं कि न केवल कल्याण योजनाओं के लिए एक डिजिटल व्व्यवस्था की सुविधा देकर, बल्कि परिवारों के लापता सदस्यों को वापस परिवार से मिलाकर; आधार जीवन को किस प्रकार आसान बना रहा है।

15 वर्ष की आयु का एक लापता बच्चा 28 नवंबर, 2016 को नागपुर रेलवे स्टेशन पर पाया गया था। चूंकि बच्चा विशेष रूप से दिव्यांग था तथा उसे बोलने और सुनने की अक्षमता (बहरा और गूंगा) थी, इसलिए रेलवे अधिकारियों ने उचित प्रक्रिया के बाद उसे नागपुर में वरिष्ठ लड़कों के सरकारी अनाथालय को सौंप दिया। उन्हें प्रेम रमेश इंगले नाम दिया गया था।

अनाथालय के अधीक्षक और परामर्शदाता विनोद डाबेराव ने जुलाई 2022 में ‘प्रेम रमेश इंगले’ के आधार पंजीकरण के लिए नागपुर में आधार सेवा केंद्र (एएसके) का दौरा किया। लेकिन इस नामांकन के लिए आधार नहीं बनाया जा सका, क्योंकि बॉयोमीट्रिक्स एक और आधार नंबर से मेल खा रहे थे।

इसके बाद एएसके, नागपुर ने यूआईडीएआई के क्षेत्रीय कार्यालय, मुंबई से संपर्क किया। सत्यापन करने पर यह बात सामने आयी कि संबंधित युवक के पास 2016 से बिहार के खगड़िया जिले के एक इलाके का आधार है और इसमें युवक का नाम सोचन कुमार है।

आगे की जांच और सत्यापन के बाद, और उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए, अधिकारियों ने अनाथालय के अधीक्षक को युवक की पहचान के बारे में जानकारी दी। खगड़िया (बिहार) में स्थानीय पुलिस के सहयोग से परिवार को सूचना दी गई।

इसके बाद अगस्त के तीसरे सप्ताह में संबंधित पुलिस अधिकारियों और उनके गांव के ‘सरपंच’ से आवश्यक दस्तावेजों के साथ युवक की मां और चार रिश्तेदार नागपुर पहुंचे।

इस मामले ने एक बार फिर ‘आधार’ की ताकत साबित कर दी है। श्री सचिन कुमार अब मुख्य रूप से आधार के कारण अपने परिवार के साथ फिर से जुड़ गए हैं।

बाल कल्याण समिति के नियमानुसार एवं माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार बालक को सौंपने की प्रक्रिया अनाथालय के अधीक्षक एवं परामर्शदाता द्वारा संयुक्त रूप से कानूनी तौर पर पूरी कर ली गयी है।

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